लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग: सोनम वांगचुक ने सरकार को दी 2 अक्टूबर तक की डेडलाइन, आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने तथा इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार को 2 अक्टूबर तक का समय दिया है। दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस समय सीमा तक सरकार द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे फिर से शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होंगे।

प्रमुख बिंदु और चिंताएं:

  • प्रगति से असंतोष: वांगचुक ने कहा कि सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों (लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस) के बीच हुई बातचीत में बहुत धीमी प्रगति हुई है।

  • जनता की अनदेखी का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निवासियों और प्रतिनिधियों से परामर्श किए बिना भूमि, पर्यटन और औद्योगिक नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

  • जांच रिपोर्ट पर सवाल: लेह में हुई पिछली हिंसा और प्रशासनिक कार्रवाइयों पर सवाल उठाते हुए वांगचुक ने पूछा कि उस घटना की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

छठी अनुसूची की मांग क्यों जरूरी है?

लद्दाख की 97% से अधिक आबादी जनजातीय है। छठी अनुसूची लागू होने से स्वायत्त जिला परिषदों को निम्नलिखित अधिकार मिलेंगे:

  1. भूमि संरक्षण: बाहरी व्यक्तियों को जमीन खरीदने या नियंत्रण करने से रोकना।

  2. सांस्कृतिक सुरक्षा: स्थानीय परंपराओं, भाषा और रीति-रिवाजों को कानूनी संरक्षण देना।

  3. स्थानीय प्रशासन: स्थानीय संसाधनों और विकास कार्यों के निर्णय स्वयं लेने का अधिकार।