दशकों से राजनीतिक उठापटक, बड़े आंदोलनों और आम जनता की आवाज उठाने का केंद्र रहे दिल्ली के जंतर-मंतर का इतिहास अब बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को आधिकारिक तौर पर निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है, जिसका मतलब है कि अब यहां धरना-प्रदर्शनी की अनुमति नहीं मिलेगी। बता दें कि आज से ठीक 33 साल पहले सरकार ने ही जंतर-मंतर को धरने के लिए अधिकृत किया था।
अब कहां होंगे प्रदर्शन? (नए विकल्प)
गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक विशेष कमेटी की सिफारिश के बाद, दिल्ली में तीन नए स्थानों को विरोध प्रदर्शन के लिए तय किया गया है:
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रामलीला मैदान
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बुराड़ी ग्राउंड
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पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड
इन तीनों स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर जल्द ही संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाएगी।
जंतर-मंतर को सूची से हटाने की मुख्य वजह क्या है?
सरकार की ओर से भले ही इस पर कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण नहीं बताया गया हो, लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सुरक्षा मानी जा रही है।
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जंतर-मंतर संसद भवन से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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हाल ही में, जब कॉकरोच पार्टी (CJP) ने यहां धरना दिया था, तो प्रदर्शनकारी संसद के बेहद नजदीक पहुंच गए थे, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से संसद के दरवाजे तक बंद करने पड़े थे।
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इसके अलावा, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसी बड़ी जगहों की तलाश करने पर जोर दिया था जहां प्रदर्शनकारियों के लिए पानी, टॉयलेट और मेडिकल जैसी बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं यहां हुए आंदोलन
जंतर-मंतर सिर्फ एक धरना स्थल नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के कई बड़े पलों का गवाह रहा है।
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देश का सबसे बड़ा अन्ना आंदोलन यहीं पर परवान चढ़ा था।
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देश का मान बढ़ाने वाले पहलवानों का चर्चित प्रदर्शन भी इसी जगह पर हुआ था।
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इसके अलावा, हाल ही में NEET और अन्य मुद्दों को लेकर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरने भी यहीं आयोजित हुए थे।
(दिलचस्प बात यह है कि 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बनवाए गए इस ‘जंतर-मंतर’ का मूल उपयोग ग्रहों और समय की सटीक गणना के लिए किया जाता था, जो बाद में देश की राजनीति का मुख्य अखाड़ा बन गया।)
वर्तमान विवाद और ताजा स्थिति
हाल ही में कॉकरोच पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़े मुद्दों और SIR पर रोक की मांग को लेकर एक बार फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने साफ इनकार कर दिया है। इस रोक के बाद से विपक्षी दलों और राजनीतिक संगठनों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है कि आने वाले समय में विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा कैसी होगी।